अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसेना के तीन जहाजों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन अमेरिकी सेना ने इन हमलों को बीच में ही रोक दिया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, गुरुवार को अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे थे, तभी ईरान की ओर से ‘बिना उकसावे’ के हमला किया गया। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा में ईरान के उन सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की, जहां से हमले किए गए थे। अमेरिका ने कहा कि उसके किसी भी जहाज को नुकसान नहीं पहुंचा है और वह युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह भी पढ़ें- Russia-Ukraine War: रूस ने यूक्रेन के साथ युद्धविराम की घोषणा की, 8-10 मई तक लागू रहेगा सीजफायर; जानें सबकुछ
राष्ट्रपति ट्रंप ने की हमले की पुष्टि
इसे लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका के तीन बड़े युद्धपोत सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर गए, जबकि उन पर हमला किया गया था। ट्रंप के मुताबिक, इन जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन जवाबी कार्रवाई में ईरान के हमलावर पूरी तरह तबाह हो गए। कई छोटी नावें भी समुद्र में डुबो दी गईं, जिनका इस्तेमाल ईरान अपनी कमजोर पड़ चुकी नौसेना की जगह कर रहा था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइलें और ड्रोन दागे गए, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान सामान्य देश की तरह व्यवहार नहीं कर रहा और वहां ‘कट्टरपंथी’ लोग सत्ता चला रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया तो अमेरिका भविष्य में और ज्यादा कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी युद्धपोत अब फिर से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी में शामिल होंगे, जिसे उन्होंने ‘स्टील की दीवार’ बताया।
होर्मुज में गोलीबारी से दुनिया में हड़कंप
वहीं ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि केश्म द्वीप इलाके में ईरानी सेना और ‘दुश्मन’ के बीच गोलीबारी हुई। तेहरान और दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास इलाके में भी धमाकों और हवाई सुरक्षा प्रणाली की आवाजें सुनाई दीं। हालांकि विस्फोटों की असली वजह स्पष्ट नहीं हो सकी।
होर्मुज में फिर रुकी जहाजों की आवाजाही
इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी हालात गंभीर बने हुए हैं। ईरान ने जहाजों की जांच और टैक्स वसूली के लिए एक नई सरकारी एजेंसी बनाई है। यह जलमार्ग दुनिया में तेल और गैस सप्लाई का सबसे अहम रास्ता माना जाता है। ईरान की सख्ती के कारण फारस की खाड़ी में सैकड़ों व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं और वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। कई देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है।
अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कोशिशें
उधर, पाकिस्तान लगातार अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। पाकिस्तान का कहना है कि दोनों देशों के बीच जल्द समझौते की उम्मीद है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा कि उनका देश ‘दिन-रात’ दोनों पक्षों से संपर्क में है ताकि युद्ध पूरी तरह खत्म हो सके और संघर्ष विराम जारी रहे।
यह भी पढ़ें- ट्रंप धमकी मामला: पूर्व FBI डायरेक्टर जेम्स कोमी की कोर्ट में पेशी रद्द करने की मांग, 86-47 पोस्ट बना मुसीबत
ट्रंप ने ईरान को दी बमबारी की धमकी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने वेटिकन में पोप लियो 14 से भी मुलाकात की और पश्चिम एशिया शांति प्रयासों पर चर्चा की। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो फिर से बमबारी हो सकती है। हालांकि उन्होंने फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को सैन्य बल से खोलने की अमेरिकी योजना रोक दी है।
वॉशिंगटन में अगले हफ्ते इस्राइल-लेबनान की होगी वार्ता
इधर, इस्राइल और लेबनान के बीच भी अगले सप्ताह वॉशिंगटन में सीधी बातचीत होने वाली है। माना जा रहा है कि अमेरिका पूरे पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है। वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के बारे में कहा जा रहा है कि वे अमेरिका से चल रही बातचीत पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
अन्य वीडियो