दुनिया भर की निगाहें जिस भू-राजनीतिक संकट पर टिकी थीं, वहां से एक बड़ी कूटनीतिक राहत की खबर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को धीरे-धीरे फिर से खोलने पर बनी बहुप्रतीक्षित सहमति ने न केवल वैश्विक युद्ध के तनाव को कम किया है, बल्कि बुलियन मार्केट में एक नई और आक्रामक रैली की शुरुआत कर दी है। युद्ध शुरू होने के बाद इसे सबसे ठोस राजनयिक घटनाक्रम माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते की उम्मीदों के कारण तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई है, साथ ही डॉलर भी कमजोर हुआ है। इन वैश्विक कारकों और मुद्रास्फीति के दबाव में कमी के चलते निवेशकों का रुख सुरक्षित निवेश की तरफ बढ़ा है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड ऊंचाई को छू लिया है।
गुरुवार को कॉमेक्स बाजार में सोने की कीमत 4,760 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई और चांदी की कीमत 80 डॉलर प्रति औंस के पार हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बढ़त अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनने की खबरों के बीच देखी गई।
बुलियन बाजार में 7 मई, गुरुवार को 24 कैरेट सोना 470 रुपये यानी 0.310 प्रतिशत की बढ़त के साथ 153,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा, जबकि 1 किलो चांदी 2140 रुपये 0.84 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 226,220 रुपये प्रति किलो पर रही। वहीं 6 मई बुधवार को भी सोने और चांदी कीमतें 10 ग्राम पर 3,224 रुपये से बढ़कर 1,50,860 रुपये पहुंच गई। वहीं बुधवार को चांदी की कीमत 8602 रुपये की तेजी के साथ 2,49,067 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई।
कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी रिटेल बिजनेस प्रमुख सुनील कटके कहते हैं, लगातार तीसरे सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़त अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनने की खबरों के बीच देखी गई। युद्ध शुरू होने के बाद से यह सबसे ठोस राजनयिक घटनाक्रम है। इस रिपोर्ट के बाद तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में तेजी से गिरावट आई, क्योंकि अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों ने मुद्रास्फीति की आशंकाओं को कम कर दिया। डॉलर भी युद्ध-पूर्व स्तर पर आ गया, जिससे जिससे फरवरी के अंत से सोने की कीमतों पर हावी मुद्रास्फीति का दबाव कम हो रहा है।
सोने की कीमतों में तेजी रहने की संभावना
कसाट कहते हैं, मैक्रोइकॉनॉमिक मोर्चे पर, उम्मीद से कमज़ोर एडीपी पेरोल डेटा ने अमेरिकी श्रम बाजार में नरमी के संकेतों को और मजबूत किया। यदि शुक्रवार की आधिकारिक रोजगार रिपोर्ट मंदी की पुष्टि करती है, तो फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना और बढ़ सकती है, जिससे सोने और चांदी जैसी गैर-लाभकारी संपत्तियों को अतिरिक्त बढ़ावा मिलेगा। भू-राजनीतिक और मैक्रोइकॉनॉमिक दोनों कारक अब सोने के पक्ष में हैं, जिससे कीमती धातुओं को एक साथ कई मोर्चों से समर्थन मिल रहा है। मुझे उम्मीद है कि शॉर्ट टर्म के लिए सोने की 3000 रुपये तक की वृद्धि होने की संभावना है।
भाव में तेजी का क्या कारण?
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष अनुसंधान विशलेषक कमोडिटी और करेंसी जतीन त्रिवेदी ने कहा, अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर बढ़ते सकारात्मक माहौल के चलते सोने की कीमतों में करीब 850 रुपये तक की बढ़त दर्ज की गई। डॉलर सूचकांक और कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी से सोने की मजबूती बनी रही। बाजार आने वाले दिनों में सकारात्मक परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं और आशा जता रहे हैं कि अगर दोनों पक्ष प्रस्तावित शर्तों पर सहमत हो जाते हैं, तो मौजूदा युद्धविराम वार्ता एक व्यापक दीर्घकालिक शांति समझौते में तब्दील हो सकती है।
डॉलर की नरमी से सोने को कैसे मिल रहा बल?
इसके साथ ही डॉलर की नरमी भी सोने की कीमतों को सहारा दे रही है, हालांकि महत्वपूर्ण अमेरिकी मैक्रो डेटा जारी होने से पहले व्यापारी सतर्क हैं। अब सबका ध्यान कल जारी होने वाले अमेरिकी गैर-कृषि वेतन और बेरोजगारी आंकड़ों पर है, जो ब्याज दरों की उम्मीदों और सोने की अल्पकालिक दिशा को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तकनीकी रूप से, सोना 151000 रुपये के आसपास मजबूत स्थिति में है, जबकि 155000 रुपये तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है। कोटक सिक्योरिटीज की कमोडिटी रिसर्च एवीपी कायनात चैनवाला कहती हैं, सोने और चांदी की कीमतों में तेजी अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की सहमति की वजह से आई हैं। यह युद्ध शुरू होने के बाद से यह सबसे ठोस राजनयिक घटनाक्रम है। तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में गिरावट के साथ शांति समझौते की उम्मीद ने मुद्रास्फीति की बढ़ने की संभावनाओं को कम किया है। फिलहाल भू-राजनीतिक व अन्य स्थितियों की वजह से सोने और चांदी की कीमतों को समर्थन मिल रहा है।
सोने और चांदी पर आगे का आउटलुक क्या?
एमसीएक्स पर सोने की कीमतें 1,47,500 से 1,48,000 के दायरे में मजबूत दिखाई दे रही हैं। जबकि प्रतिरोध 1,56,000 के आसपास है। वहीं चांदी के लिए समर्थन कीमतें 2,25000 रुपये से 2,32,000 रुपये के आसपास है, जबकि प्रतिरोध 2,85,000 रुपये के आसपास बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि जब तक औद्योगिक क्षेत्र में चांदी की मांग में सुधार नहीं होता, आने वाले सप्ताह में सोना चांदी की तुलना में मजबूत रहने की संभावना है।
साल 2026 में अब तक 18000 रुपये चढ़ा सोना
साल 2026 में अब तक सोने की कीमत में लगभग 18,000 रुपये की तेजी दर्ज की गई है। जबकि 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपये था, जो बढ़कर अब लगभग 1.51 लाख रुपये पर पहुंच गया है। इसी तरह चांदी भी इस साल लभगभ 19,000 रुपये महंगी हुई और साल 2025 के अंतिम कारोबारी दिन चांदी 2.30 लाख रुपये रही, जो अब बढ़कर 2.49 लाख रुपये प्रति किलो हो गई है।