03:51 AM, 09-May-2026
रूस की शांति पहल: लावरोव ने यूएई से की ईरान-अमेरिका वार्ता का समर्थन करने की अपील
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में रूस ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने यूएई समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने ईरान-अमेरिका के बीच जारी वार्ता को पूर्ण समर्थन देने की आवश्यकता पर बल दिया। रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, लावरोव ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में फिर से शत्रुता और सैन्य संघर्ष को रोकने के लिए इन वार्ताओं की सफलता अनिवार्य है, ताकि पिछले कुछ समय से बनी स्थिरता के प्रयासों को कोई खतरा न पहुंचे। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी ऐसी सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए जो क्षेत्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती हो।
03:38 AM, 09-May-2026
पश्चिम एशिया संघर्ष: कतर और अमेरिका के बीच शांति बहाली पर चर्चा
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने वाशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ईरान के साथ चल रहे तनाव को खत्म करना और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करना था। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि सभी पक्षों को शांति प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए ताकि बातचीत के जरिए संकट का समाधान निकाला जा सके।
इस चर्चा के दौरान शांति प्रयासों में पाकिस्तान की मध्यस्थता वाली भूमिका की भी सराहना की गई। नेताओं ने माना कि केवल युद्ध विराम काफी नहीं है, बल्कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए एक व्यापक समझौते की जरूरत है जो विवादों की जड़ को खत्म कर सके। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दुनिया की नजरें ईरान के साथ होने वाले संभावित शांति समझौते पर टिकी हैं।
02:04 AM, 09-May-2026
ईरान में इंटरनेट बैन के 70 दिन पूरे, थमी विकास की रफ्तार, जनता की बढ़ी मुश्किलें
ईरान में जारी इंटरनेट ब्लैकआउट आज अपने 70वें दिन में प्रवेश कर गया है। इंटरनेट वॉचडॉग ‘नेटब्लॉक्स’ के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस शटडाउन ने अब तक 1656 घंटों का आंकड़ा पार कर लिया है। यह स्थिति देश के आधुनिक इतिहास में डिजिटल कनेक्टिविटी पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार बनकर उभरी है।
ईरान में इंटरनेट सेवाओं पर यह कड़ा पहरा जनवरी की शुरुआत में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद लगाया गया था। फरवरी के अंत में अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद इन प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया गया। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए लगभग पूरे देश में डिजिटल संचार को ठप कर दिया है।
70 दिनों से जारी इस पाबंदी ने देश के व्यापारिक ढांचे को हिला कर रख दिया है। छोटे व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गए हैं और ऑनलाइन आधारित नौकरियां खत्म होने की कगार पर हैं। सबसे ज्यादा प्रभाव दिव्यांगों, छात्रों और मध्यम वर्ग के व्यापारियों पर पड़ा है। छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है और आवश्यक सेवाओं तक पहुंचना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
🗓️ Today marks the 70th day of #Iran‘s internet blackout, with the incident now surpassing 1656 hours. Digital connectivity is vital in times of crisis, and limiting service harms those most in need – people with disabilities, students, small businesses and the general public. pic.twitter.com/e76s9Hedjn
— NetBlocks (@netblocks) May 8, 2026
02:00 AM, 09-May-2026
यूरेनियम संवर्धन पर रोक से लेकर होर्मुज तक…ईरान को अमेरिका का 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव!
न्यूज एजेंसी अल जजीरा के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के पास एक गोपनीय 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन भेजा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और परमाणु हथियारों की होड़ पर लगाम लगाना है। अपुष्ट खबरों के अनुसार, इस प्रस्ताव की मुख्य शर्त ईरान द्वारा यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना और परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में कदम बढ़ाना है, जो राष्ट्रपति ट्रंप की ‘रेड लाइन’ के अनुरूप है। इसके बदले में अमेरिका होर्मुज से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने पर विचार कर रहा है, बशर्ते ईरान सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों को बिना किसी शुल्क या बाधा के वहां से सुरक्षित रास्ता देने की गारंटी दे।
हालांकि इस मसौदे की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन किसी भी ऐसे समझौते पर सहमत नहीं होगा जिसमें ईरान की परमाणु शक्ति बनने की संभावना को पूरी तरह समाप्त न किया गया हो।
12:59 AM, 09-May-2026
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और यवेट कूपर के बीच फोन पर हुई बातचीत, क्षेत्रीय तनाव कम करने पर जोर
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर के बीच हुई टेलीफोनिक वार्ता ने वैश्विक राजनीति में हलचल तेज कर दी है। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच संघर्ष के चलते पूरा इलाका बारूद के ढेर पर बैठा है।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने दावा किया कि यूनाइटेड किंगडम, ईरान पर हुए शुरुआती अमेरिकी और इस्राइली हमलों में शामिल नहीं था। हालांकि, ब्रिटेन ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। इन अड्डों का उपयोग पश्चिम एशिया में रक्षात्मक अभियानों’ के लिए किया जा रहा है। ब्रिटेन का यह स्टैंड बताता है कि वह सीधे युद्ध से बचते हुए भी अपने सहयोगियों को पूरी सैन्य मदद दे रहा है।
ईरान की ओर से होर्मुज को बंद किए जाने के बाद को प्रभावी ढंग से बंद किए जाने के बाद वैश्विक व्यापार संकट गहरा गया है। इस महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को फिर से खोलने के लिए अब ब्रिटेन और फ्रांस ने अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व संभाल लिया है। दोनों देश मिलकर एक ऐसे गठबंधन पर काम कर रहे हैं जो इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
12:52 AM, 09-May-2026
ईरान को लेकर उलझन में ट्रंप प्रशासन, इस रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
वाशिंगटन डीसी से माइक हन्ना की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में ट्रंप प्रशासन एक बेहद अजीब और उलझाव भरी स्थिति से गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच के रिश्तों को इस समय युद्ध नहीं, बल्कि एक ‘लिम्बो’ यानी अधर में लटकी हुई स्थिति माना जा रहा है। ट्रंप प्रशासन का यह मानना है कि दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष का फिलहाल एक अंत हो चुका है।
प्रशासन का एक सुर, पर रणनीति में भारी सस्पेंस
ट्रंप प्रशासन के भीतर इस मुद्दे पर पूरी तरह से एकजुटता दिखाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री समेत प्रशासन के तमाम बड़े चेहरे एक ही राय रखते हैं। उनका कहना है कि ईरान के साथ फिलहाल युद्ध विराम जैसी स्थिति है। अमेरिका अब इस ठहराव को मैनेज करने की कोशिश कर रहा है। व्हाइट हाउस का पूरा ध्यान उन शर्तों को मनवाने पर है, जिस पर वह शुरू से अड़ा हुआ है।
युद्ध खत्म होने का संकेत, मगर उंगली अभी भी ट्रिगर पर
भले ही प्रशासन युद्ध खत्म होने के संकेत दे रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है। अमेरिकी प्रशासन के बयानों में एक छिपा हुआ संदेश है। उनका कहना है कि युद्ध तो खत्म हो गया है, लेकिन अमेरिका किसी भी वक्त हमला करने के लिए तैयार बैठा है। यदि ईरान की ओर से कोई भी हलचल होती है, तो अमेरिका दोबारा युद्ध शुरू करने में जरा भी देरी नहीं करेगा।
यह पूरी स्थिति वर्तमान में बेहद भ्रमित करने वाली बनी हुई है। एक तरफ शांति और बातचीत की मेज सजाने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी तरफ हथियारों की तैनाती कम नहीं की गई है। अमेरिका चाहता है कि वह अपनी शर्तों पर ईरान को बातचीत के लिए मजबूर करे। इस रणनीतिक पॉज को ट्रंप प्रशासन अपनी जीत के तौर पर देख रहा है, जबकि रक्षा विशेषज्ञ इसे आने वाले बड़े तूफान से पहले की शांति मान रहे हैं।
12:22 AM, 09-May-2026
West Asia LIVE: ईरान में इंटरनेट बैन के 70 दिन पूरे; रूस ने यूएई से की शांति वार्ता का समर्थन करने की अपील
होर्मुज में ईरानी दादागिरी के खिलाफ अमेरिका ने कसी कमर, रुबियो ने इटली से की समर्थन की अपील
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान के बढ़ते खतरे को लेकर यूरोपीय सहयोगियों को सख्त चेतावनी दी है। रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से होर्मुज की घेराबंदी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यूरोप से केवल बयानबाजी छोड़कर ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
ईरान का बढ़ता नियंत्रण वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा
इतालवी प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के साथ बैठक के बाद रुबियो ने पत्रकारों से बात की। उन्होंने कहा कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अपना नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। रुबियो ने इसे अस्वीकार्य करार दिया। उनके अनुसार, यह केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।
क्या सिर्फ कागजों पर रहेगा विरोध?- रुबियो
विदेश मंत्री रुबियो ने कहा कि हर कोई मानता है कि ईरान एक खतरा है। सब सहमत हैं कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। लेकिन अब समय कुछ करने का है। रुबियो ने चेतावनी दी कि अगर आपके पास कार्रवाई के लिए कुछ नहीं है, तो केवल कड़ी निंदा वाले बयानों का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने पूछा कि अगर ईरान अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कब्जा करता है, तो दुनिया क्या करने को तैयार है? रुबियो के इन प्रयासों के बावजूद अमेरिका और यूरोप के बीच दरार साफ दिख रही है।