अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए प्रस्ताव पर असंतोष व्यक्त किया है। ईरान ने यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से प्रस्तुत किया था। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है लेकिन वह इससे संतुष्ट नहीं हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि पिछले सप्ताह अपने दूतों की पाकिस्तान यात्रा रद्द करने के बाद से बातचीत फोन पर जारी है।
ईरान ने प्रगति की है, लेकिन पर्याप्त नहीं- ट्रंप
प्रेस से बातचीत जारी रखते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान ने समझौते की दिशा में प्रगति की है, लेकिन उन्हें यकीन नहीं है कि वे कभी समझौते तक पहुंच पाएंगे। पाकिस्तान में आमने-सामने की बातचीत के संभावित नए दौर के बारे में ट्रंप ने कहा कि फिलहाल सभी बातचीत फोन पर हो रही है।
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ट्रंप ने फिर किया दावा- ईरान का नेतृत्व ‘असंबद्ध
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘अत्यधिक मतभेद हैं… उन्हें आपस में तालमेल बिठाने में बहुत दिक्कत हो रही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘नेतृत्व बहुत बिखरा हुआ है, इसमें दो-तीन गुट हैं, शायद चार… इसके बावजूद, वे सभी समझौता करना चाहते हैं।’ ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि वे युद्ध और वार्ता से संबंधित मुद्दों सहित सभी मामलों में देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रति एकजुट हैं।
ईरान को पता नहीं कि उनका नेता कौन हैं- ट्रंप
पश्चिम एशिया संघर्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘अधिकांश लोग इसे पूरी तरह से असंवैधानिक मानते हैं। हमने युद्धविराम किया है, जिससे हमें अतिरिक्त समय मिल गया है, लेकिन किसी अन्य देश ने ऐसा नहीं किया है। हम एक बड़ी जीत के बीच में हैं… हम ईरान से बातचीत कर रहे हैं। वे समझौता करना चाहते हैं। वे करीब आते हैं, और फिर लोगों का एक नया समूह आ जाता है। उन्हें नहीं पता कि उनके नेता कौन हैं… वे बहुत भ्रमित हैं।’
#WATCH | Florida: On the West Asia conflict, US President Donald Trump says, “… Most people consider it totally unconstitutional. Also, we had a ceasefire, so that gives you additional time, but no other country has done it. We are in the midst of a big victory… We have been… pic.twitter.com/BWzEovQQb1
— ANI (@ANI) May 1, 2026
अमेरिका-ईरान पर बन रहा अंतरराष्ट्रीय दबाव
वहीं, कई देश अमेरिका और ईरान पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। पाकिस्तान ने युद्ध समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। चीन भी पर्दे के पीछे चुपचाप अपना प्रभाव डाल रहा है। खाड़ी देश और पड़ोसी देश भी अमेरिका पर युद्धविराम बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं।
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ईरान की बदली हुई मांगें
वहीं, ईरान अब प्रतिबंधों और मुआवजे की बात नहीं कर रहे हैं। ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को मुख्य मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है। विश्व स्तर पर, हर कोई यथास्थिति बनाए रखने की दिशा में काम कर रहा है।
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